मोटा एंडोमेट्रियम के साथ भारी गर्भाशय क्या है?HealthPlanet

Posted on Tue 7th Feb 2023 : 11:02

एंडोमेट्रियोसिस (Endometriosis) महिलाओं में होने वाली गर्भाशय से संबंधित समस्या है. इसमें गर्भाशय के अंदर के टिशू (ऊतक) बढ़कर गर्भाशय के बाहर निकलने और फैलने लगते हैं. यह फैलोपियन ट्यूब और अंडाशय के बाहरी और अंदरूनी हिस्सों में भी फैलने लगते हैं. इससे महिलाओं को तेज दर्द होता है. विशेषकर जब उनका मासिक चक्र आता है, तब दर्द और बढ़ जाता है. यह ऊतक गर्भाशय के अंदर वाले ऊतक की तरह ही होता है, लेकिन मासिक चक्र के समय यह बाहर नहीं निकल पाता है, जिसके कारण दर्द होने लगता है. इस समस्या के कारण महिलाओं में प्रजनन क्षमता भी कम हो सकती है. आइए जानते हैं की एंड्रियोमेट्रिओसिस की समस्या क्यों होती है और इससे बचाव कैसे किया जा सकता है.

एंडोमेट्रिओसिस होने के कारण

एंडोमेट्रियोसिस का एक कारण है रेट्रोग्रेड मेंस्ट्रुएशन है, जिसमें मासिक धर्म के दौरान खून में एंडोमेट्रियल कोशिकाएं आमतौर पर शरीर से बाहर नहीं निकल पाती हैं बल्कि यह फैलोपियन ट्यूब से पैल्विक केविटी में वापस प्रवाहित होने लगती हैं. ये एंडोमेट्रियल कोशिकाएं सभी पेल्विक अंगों पर चिपक जाती हैं और मासिक धर्म चक्र के दौरान ब्लीडिंग शुरू कर देती हैं.

दूसरा कारण पेरिटोनियल कोशिकाओं का बदलना हो सकता है, जिसे इंडक्शन थ्योरी भी कहा जाता है. पेरिटोनियल कोशिकाओं में बदलाव होने के कारण एंडोमेट्रियोसिस होने की संभावना होती है. इसमें एस्ट्रोजन जैसे हार्मोन शुरुआती अवस्था में भ्रूण की कोशिकाओं को परिवर्तित कर सकते हैं.

जब किसी प्रकार की सर्जरी कराई जाती है, जैसे सी-सेक्शन या हिस्टेरेक्टॉमी जैसी सर्जरी कराने पर एंडोमेट्रियल कोशिकाएं सर्जरी के चीरे से चिपक सकती हैं.

एक सबसे बड़ा कारण कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली भी हो सकती है, जिसकी वजह से एंडोमेट्रियल ऊतकों को प्रतिरक्षा प्रणाली नष्ट नहीं कर पाती है.

एंडोमेट्रिओसिस से ऐसे करें बचाव
शरीर में एंडोमेट्रियोसिस होने की संभावना एस्ट्रोजन हार्मोन के स्तर के बढ़ने के कारण होती है. लेकिन यदि एंडोमेट्रियल की समस्या हो रही है तो इसे रोक पाना मुश्किल है, इसलिए शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन को कम करके एंडोमेट्रियोसिस होने की संभावना से बचाव किया जा सकता है. दरअसल, एस्ट्रोजन मासिक धर्म चक्र के समय गर्भाशय की लाइनिंग मोटी हो जाती है. इसके लिए हार्मोनल गर्भनिरोधक दवाओं या गर्भनिरोधक उपचारों के माध्यम से एस्ट्रोजन का लेवल कम किया जा सकता है, लेकिन बिना किसी डॉक्टर के परामर्श के यह दवाएं नहीं लेनी चाहिए.

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